स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भी भारत मं जनसामान्य के बच्चों की शिक्षा के प्रति उपेक्षा व दुर्व्यवस्था से व्यथित होकर मा. भाऊराव देवरस एवं श्रीकृष्ण चंद्र गांधी सरीखें तत्कालीन राष्ट्रीय चिंतकों व मनीषियों ने सन्त प्रभुदत्त ब्रह्मचारी, श्री हनुमान प्रसाद पोददार एवं डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महामानवों के आशीर्वाद से 'बालक के सर्वागीण विकास ' की संकल्पना के साथ एक अभिनव शैक्षिक योजना का श्री गणेश १९५२ में गोरखपुर में किया। सामाजिक स्वीकार्यता व सम्बल के आधार पर निरन्तर गतिमान व कीर्तिवान होते हुए इन विद्यालयों ने आपातकालीन झंझावतों को चीरते हुए वटवृक्ष का रूप लेकर १९८७ में विद्या भारती-अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के नाम से विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी शैक्षिक संगठन की ख्याति प्राप्ति की। ऐसी उत्तम शिक्षा को जनपद के बालकों को दिलाने हेतु नगर के प्रसिद्ध व्यवसायी श्री मणिकान्त वैश्य जी ने अपनी श्रद्धेय नानी जी श्रीमती द्रौपदी देवी जी की स्मृति में सन १९८६ में द्रौपदी देवी सरस्वती विद्या मंदिर की आधारशिला रखी जिसने वर्तमान में द्रौपदी देवी सरस्वती विद्या मन्दिर इंटर कॉलेज के नाम से जनपद में ही नहीं अपितु प्रदेश में अपना विशिष्ट स्थान बनाते हुए बालकों की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है।
भारतीय शिक्षा समिति उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित आपका अपना विद्यालय नगर के कोलाहल से दूर प्रकृति के सुरम्य वातावरा में चन्दौसी मार्ग पर स्थित भारतीय शिक्षा पद्धति पर आधारित अभिनव शिक्षा केंद्र प्रगति के पथ पर अग्रसर है विगत वर्षो से विद्यालय का बोर्ड परीक्षाफल (हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट) शतप्रतिशत रहा है | विद्यालय के छात्रों ने शारीरिक (खेलकूद प्रतियोगिताओं में) बौद्धिक (प्रश्न मंच) विज्ञान (विज्ञान क्विज, मॉडल प्रदर्शन) प्रतियोगिताओं में प्रान्त एवं अखिल भारतीय स्तर तक कीर्तिमान स्थापित कर विद्यालय को गौरवान्वित किया है |
* योग्य अनुभवी एवं प्रशिक्षित आचार्यो द्वारा प्रशिक्षण |
* पंचपदी शिक्षण पद्धति एवं पंचमुखी शिक्षा पर बल |
* भारतीय परिवेशयुक्त, संस्कारक्षम वातावरण |
* भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान एवं कम्प्यूटर विज्ञान की आधुनिक प्रयोगशालाएं |
* विशाल क्रीड़ा स्थल एवं पर्याप्त खेल सामग्री |
* आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य सुसज्जित भवन |
* शीतल जल की उत्तम व्यवस्था |
* विद्यालय आवागमन हेतु सुद्रढ़ वाहन व्यवस्था |
* प्रकाश हेतु विद्युत् एवं जनरेटर व्यवस्था |
* प्रत्येक वर्ष पर्यटन स्थलों का भ्रमण |
* आंग्ल वार्तालाप (इंग्लिश स्पीकिंग) कक्षा 6 से 12 तक अनिवार्य |
* इण्टरमीडिएट में कप्यूटर सांइस की मान्यता प्राप्त |
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